यमनी सरकार के प्रवक्ता ने ब्रिटेन के विदेशमंत्री जेरमी हंट की अघोषित अदन यात्रा को यमन के अतिग्रहण में लंदन की भूमिका का सूचक बताया है।
ज़ैफुल्लाह अश्शामी ने कहा कि वार्सा बैठक के बाद यमन के अतिक्रमण हेतु ब्रिटेन की गोपनीय भूमिका दोबारा आरंभ हो गयी है। कई दिन पहले ब्रिटेन के विदेशमंत्री जेरमी हंट ने सऊदी अरब की यात्रा की थी और उसके बाद वह एक भड़काऊ कार्यवाही के अंतर्गत यमन के अदन नगर पहुंचे।
लंदन ने वर्षों पहले दक्षिणी यमन का अतिग्रहण करके अपने स्ट्रैटेजिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाया था और अब उसने अपनी पहले की गलतियों को सुधार करके संयुक्त अरब इमारात और सऊदी अरब के माध्यम से अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की चेष्टा में है।
दक्षिणी यमन में ब्रिटेन की गोपनीय गतिविधियां 128 साल पहले उस दौर की याद दिलाती हैं जब ब्रिटेन ने यमन के अदन नगर पर अतिग्रहण कर रखा था। ब्रिटेन की गतिविधियां इस बात की सूचक हैं कि लंदन यमन में अपने अवैध हितों से संतुष्ट नहीं हुआ है।
अन्नज्मुस्साक़िब साइट ने लिखा है कि ब्रिटेन अपनी ग़लतियों में सुधार करके यमन लौट रहा है। ब्रिटेन का कभी भी न तो शांतिपूर्ण रवइया था और न ही वह यमनी जनता के हित में था और न है बल्कि पहले चरण में ब्रिटेन अपने घटकों को यमन की उस दलदल से निकालना चाहता है जिसे अमेरिका और इस्राईल ने उत्पन्न किया है जबकि ब्रिटेन का दूसरा लक्ष्य यमन को कई स्वतंत्र क्षेत्रों में बांटना है।
यमन में ब्रिटेन की जो भूमिका है उसे पूरी तरह देखा जा सकता है और मित्थ्याचार पर आधारित ब्रिटेन की नीति की अनदेखी नहीं की जा सकती है। अमेरिका और ब्रिटेन सऊदी अरब को आधुनिकतम यहां तक कि प्रतिबंधित हथियारों से लैस कर रहे हैं उनके इस कृत्य को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
यमन का अदन क्षेत्र सदैव विदेशी सेनाओं और साम्राज्यवादी शक्तियों की उपस्थिति का साक्षी रहा है और आज अदन में संयुक्त अरब इमारात की जो भूमिका है वह ब्रिटेन द्वारा इस नगर और यमनी द्वीपों के अतिग्रहण की याद दिलाती है। ब्रिटेन ने लाल सागर के आरंभ में स्थित ब्रिम द्वीप पर 1799 में कब्ज़ा करके अपना अतिग्रहण आरंभ किया था।
ब्रिटेन आज भी यमन के अदन और इस देश के दक्षिणी प्रांतों पर कब्ज़ा करने की चेष्टा में है परंतु इस बार उसके कार्य में टैक्टिक अंतर है और वह यह है कि यह कार्य संयुक्त अरब इमारात अंजाम दे रहा है।
दूसरे शब्दों में इस समय यमन में संयुक्त अरब इमारात ब्रिटेन की नीतियों को लागू कर रहा है और ब्रिटेन संयुक्त अरब इमारात और स्थानीय सैनिकों के माध्यम से यमन का विभाजन करना चाह रहा है।